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Global Achievement: भारत के प्रतिष्ठित हड्डी एवं खेल चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. जुझार सिंह को अंतरराष्ट्रीय शोध मूल्यांकन संस्था SciRank Global ने विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल किया है। SciRank Global संस्था ने डॉ जुझार के विश्व स्तरीय रिसर्च वर्क की सराहना करते हुए एक प्रमाण-पत्र भी जारी किया है।
SciRank Global संस्था हर साल दुनिया भर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के रिसर्च वर्क का मूल्यांकन करती है और मानवता की सेवा में ऐतिहासिक योगदान करने वाले डॉक्टर्स की लिस्ट जारी करती है।
VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली स्थित स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. सिंह के शोध को Google Scholar पर अब तक 109 से अधिक उद्धरण (Citations) प्राप्त हो चुके हैं। उनका शोध क्षेत्र ऑर्थोपेडिक्स एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन है।
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डॉ. जुझार की शानदार शैक्षणिक सफलताएं
डॉ. जुझार सिंह ने MBBS की पढ़ाई दिल्ली के प्रतिष्ठित मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) से MS ऑर्थोपेडिक्स की उपाधि प्राप्त की। वे DNB ऑर्थोपेडिक्स एवं MNAMS से भी विभूषित हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पोर्ट्स मेडिसिन, आर्थ्रोस्कोपी एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट में उन्नत फेलोशिप ट्रेनिंग हासिल की है।
डॉ जुझार ने UPSC में दो बार ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है और भारतीय ऑर्थोपेडिक संघ (IOA) का गोल्ड मेडल भी जीता है। साथ ही वे अमेरिका से FACS (Fellow of the American College of Surgeons) की मानद उपाधि भी हासिल कर चुके हैं।
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राष्ट्रीय खेल संस्थाओं में अभूतपूर्व योगदान
मौजूदा वक्त पर डॉ. सिंह में भारतीय खेल प्राधिकरण (Sports Authority of India — SAI) और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के लिए एडवाइजर ऑर्थोपेडिक एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट के रूप में काम कर रहे हैं। एलीट एथलीटों की देखभाल, जोड़ संरक्षण (Joint Preservation), आर्थ्रोप्लास्टी और जटिल पेल्वी-एसिटेबुलर ट्रॉमा का इलाज करने में उन्हें महारथ हासिल है।
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15 सालों से ज्यादा के अनुभव के साथ, डॉ. सिंह ने स्पोर्ट्स मेडिसिन, आर्थ्रोस्कोपी, जॉइंट रिप्लेसमेंट और जटिल ट्रॉमा के क्षेत्र में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी इस असाधारण उपलब्धि से देश के चिकित्सा जगत में गर्व की लहर है।
डॉ. जुझार सिंह की ये कामयाबी नई पीढ़ी के डॉक्टर्स के लिए एक प्रेरणा है। एक सरकारी अस्पताल में काम करते हुए, मरीज़ों की सेवा करते हुए — उन्होंने दुनिया में भारत और अपनी एक अलग पहचान बनाई है।